Wednesday, February 15, 2012

शेरों के बीच सेक्युलर सियार

ये कुरैशी साहब हैं, कोई टी एन सेशन नहीं पद की मर्यादा से इन्हें कोई लेना-देना नहीं है। जो हिंदुत्व की बात करेगा (वरुण गांधी, बाल ठाकरे) वो जेल जाएगा लेकिन जो मुसलामानों के आरक्षण की बात करेगा वो बेदाग़ रहेगा और बा-इज्ज़त बहाल रहेगा इतना भेद-भाव तो इस विदेशी-इस्लामिक सरकार से ही हो सकता है। ---अरे सेक्युलर गधों। अगर सच्चे हिन्दू हो तो इस कांग्रेस को वोट मत देना। और अगर कांग्रेस से इतना ही लगाव है तो हिन्दू होने का नाटक मत करो। अपना धर्म परिवर्तन कर लो। शेरों के मध्य सियार जंचते नहीं हैं।

11 comments:

दिवस said...

जबरदस्त लताड़ पड़ी है आज तो सेक्युलर गधों को।
हिन्दू नाम लेते ही राजनीतिज्ञों के पद की मर्यादा भंग हो जाती है। मुसलमानों के तलवे चाल्टने जैसा कोई सेक्युलारी काम हो ही नहीं सकता। सेक्युलरिज्म के सर्टिफिकेट तो ये मुल्ले ही बांटते हैं न। इनकी एकता ने इन्हें यह ताकत दी है। खुद को सेक्युलरिज्म से कोसों दूर रख कर दूसरों को सेक्युलर बनाना, वाह क्या ताकत है इस एकता में।
सेक्युलर गधों, संभल जाओ। वरना शुरुआत हो चुकी है। 3 मार्च से शरिया फॉर हिंद रैली शुरू हो रही है। अभी तो 20 % मुल्ले हैं तो इतनी अकाद, कहीं 50 के पार पहुँच गए तो हिन्दुओं सांस लेना मुश्किल हो जाएगा इस हिन्दुस्थान में।

arvind said...

vaah...bahut badhiya....seedhi our sacchi baat kah di aapne..

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

Yeah, Thats it, I totally agree with you Divya ji.

dr.mahendrag said...

Aaj secularism ki paribhasha hi badal dali hai en logon ne.bhagwan hi janta hai ki es desh ka kya hoga.

Rakesh Kumar said...

आपने मेरे ब्लॉग को याद रक्खा,इसके लिए
बहुत बहुत शुक्रिया.

"---अरे सेक्युलर गधों। अगर सच्चे हिन्दू हो तो इस कांग्रेस को वोट मत देना'


माया या मुलायम उचित विकल्प हैं ?
सच्चा हिंदू किसे कहेंगें?
भारतीय जनता पार्टी भी क्या सच्चे हिंदुओं
के साथ होने का दावा कर सकती है.

अडवाणी जी के जिन्ना के सम्बन्ध में पाकिस्तान
में दिए गए बयान कितने उचित हैं?

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सार्थक प्रस्तुति!

veerubhai said...

इधर भी गधे हैं ,उधर भी गधे हैं ,जिधर देखता हूँ गधे ही गधे हैं .ये सबके सब सेक्युअलर ही गधे हैं .

veerubhai said...

जितना बड़ा गर्क हिन्दुस्तान का इस 'सेकुलर शब्द ने किया है किसी और चीज़ ने नहीं .इसे ज़मीन पर लिख कर जूते मारने चाहिए .शाहबानों का हक़ छीन ने वाले मंदिर का तालाखोलने वाले सेकुलर कहलातें हैं .

sangita said...

सेक्युलर वाद ही तो असली वोट बैंक है, सार्थक पोस्ट है.

दिलबाग विर्क said...

आपकी पोस्ट चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
http://charchamanch.blogspot.com
चर्चा मंच-791:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

Brajesh Kumar said...

very brave