Friday, December 23, 2011

हमका अईसा-वईसा न समझो हम बड़े काम की चीज़ --कांग्रेस


सन २०११ कब आया और कब ख़त्म हो चला पता ही नहीं चला ! आप लोगों ने तो शायद कुछ सार्थक किया ही न हों लेकिन हमारी सरकार जिसे झेलने के सिवा हमारे पास कोई अन्य विकल्प नहीं हैं , उसने कई मक़ाम हासिल किये हैं इस जाते हुए वर्ष में !

क्यूँ न एक नज़र डाली जाए देश की गौरवशाली सरकार पर--

१-- हम पिस्सुओं की तरह चिपके रहेंगे इस देश से , जोंक की तरह खून पियेंगे और दीमक की तरह चाट जायेंगे इस देश को ! हमने अपना वादा निभाया है पूरा-पूरा , आगे भी निभायेंगे !

२-हम परिवारवाद को ही निभायेंगे ! हम विदेशी हैं तो क्या हुआ , भारत में तो संयुक्त परिवार की परंपरा है, हम सभी अल्पसंख्यकों के साथ मिलजुलकर रहेंगे ! आप नहीं सुहाता तो जा सकते हैं, लेकिन हम तो अपने परिवार की नीव मज़बूत करके ही रहेंगे ! चाहे मेरे लाडले को मंजन करने की भी तमीज न हो , हम उसे भारत का प्रधानमंत्री बना कर ही छोड़ेंगे!

३- हम देश को बेच खायेंगे ! 2G , 3G क्या है , हम और भी बड़े घोटाले करायेंगे २०१२ में ये मेरा आपसे वादा है , बस आप वोट दे दीजिये !...अच्छा जाइए न दीजिये, हमारे पास अल्पसंख्यकों की कमी नहीं है ! उतने ही वोट काफी हैं! इतने वोटों से ही हम आपका खून चूसने में सक्षम हैं पिछले ६४ वर्षों ! आगे और गुल न खिलाया तो अपना नाम बदल देंगे!

४- आप अपने हिन्दू होने पर झूठा गर्व करते रहिये !, मूर्ख नहीं तो ! ज़रा भी एकता नहीं है आपने !, कट्टरता नहीं है ! धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सदियों से उल्लू बनते आये हो , आगे भी बनते रहोगे , और हमारी पार्टी आपकी इसी मूर्खता को पूरा-पूरा कैश करती रहेगी , ये २०१२ में हमारा आपसे वादा है! हम तुष्टिकरण की नीति नहीं छोड़ेंगे! वही तो हमारी रोजी-रोटी है!

५- हम फिर विश्व-स्तरीय खेल करायेंगे ! नए कलमाड़ी लायेंगे! करोड़ों फिर कमायेंगे !--उठो, जागो खेलो ! --बिनामतलब उछलो !

६- हम हिन्दुओं के खिलाफ जो विधेयक २०११ में लाये हैं , उससे भी बड़ा लायेंगे २०१२ में और नामोनिशान मिटायेंगे हिन्दुओं का ! सोते रहो मूर्खों, हम जारी रहेंगे ! अल्पसंखक जिंदाबाद!-- काफिरों अपना धर्म बदलो नहीं तो पछताओगे !

७-हम विदेशियों के तलवे चाटना बंद नहीं करेंगे ! हम बहुएं भी लायेंगे, हम दामाद भी लायेंगे! आतंकवादियों को शरण देकर हम पाकिस्तान यहीं बनायेंगे !

८- हम FDI -retail भी लायेंगे! वालमार्ट भी लायेंगे ! ५१ प्रतिशत तो कम है जी , हम ७१ भी दे आयेंगे ! हम मालिक उन्हें बनायेंगे !

९-धन पीला हो या काला हो हम वापस नहीं लायेंगे ! जब तक चूस सकेंगे हम , इसे चूसते जायेंगे !

१०- देशभक्तों को मारेंगे हम , भ्रष्टाचार बढ़ायेंगे ! जनलोकपाल बिल पास हो गया कहीं तो हम सरकार कैसे चलायेंगे ? जनता को मूर्ख कैसे बनायेंगे ?

सरकार की उपलब्धियों पर तो पुराण लिखी जा सकती है , स्मृति ही साथ नहीं देती ! इनकी यश-गाथा में कुछ सहयोग आप भी दें !

Zeal
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43 comments:

kshama said...

Jhelte jayenge! Hamaree hee chunee huee sarkaar jo hai! Doosaree party bhee aa jaye to kya hoga? Sabhee ek hee mala ke motee hain!

ZEAL said...

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क्षमा जी, मैंने तो कभी इस महान सरकार को नहीं चुना , क्या आप इन्हें ही वोट देती हैं ? --रही बात अन्य सरकारों की तो उनका भी नंबर आएगा , देश और जनता के हितों के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी सरकार को बख्शा नहीं जाएगा ! फिरहाल तो जो सरकार सत्ता में बैठकर विनाश-लीला कर रही है , उसकी ही चर्चा की जाए तो बेहतर !

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Rajesh Kumari said...

bharat ki janta ab itni bholi bhi nahi hai ki aage bhi yeh sarkar isi tarah khoon choosti rahegi jaagrati aa rahi hai aur aayegi kam se kam is soi janta ko uthani ka aavhaan kisi ne to kiya kahte hain jab soya sher jaag jata hai fir dushman sar par pair rakhkar bhaagta hai.haath milaao aur aage badho angrejon ko dhool chatvaa di to ye muththi bhar bhrast neta kya cheej hai.jai bhaarat jai hindustaan.

सदा said...

बहुत सही लिखा है आपने ... बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

aap eun hee prayas karti rahein..logon kee samajh me jarur aayga..shandar vyangya..sadar badhayee

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

बेहतरीन बेहतरीन बेहतरीन
इस आलेख की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है| शब्द ही नहीं मिल रहे|
एक एक को चुन चुन कर मारा है कसम से| सारी बत्तियां उधेड़ कर रख दीं आपने| सारी पोल पत्री खोल दी| क्या कुछ बुरा नहीं किया इस सरकार ने, किन्तु अभी भी कुछ लोगों को आने वाली सरकार के कामों की चिंता है|
खैर कब तक सच्चाई से मूंह छिपा कर भागेंगे|
कांग्रेस को यदि अल्पसंख्यकों के वोट भी मिलना बंद हो जाए, तब भी यह सरकार बना लेगी| आखिर वोटिंग मशीन की बीमारी भी तो इसी कांग्रेस की देन है| जब सात में से पांच वोट कांग्रेस के नाम पर गिरेंगे तो किसकी मजाल जो हिला दे उसे कुर्सी से?
आपने सेक्युलर हिन्दुओं को गज़ब की लताड़ पिलाई है| देखते हैं कब जागता है इनका स्वाभिमान? आपकी पोस्ट पढ़कर निश्चित रूप से कई सेक्युलरों को खुद पर शर्म आएगी|
एक बेहद ही शानदार प्रस्तुति|

डा. अरुणा कपूर. said...

बहुत बढ़िया व्यंग्य दिव्याजी!...हमारा देश ऐसे ही महान नेताओं के डंडे से हांका जा रहा है!....लेकिन कहते है कि 'उसकी लाठी में आवाज नहीं होती..'ऐसे स्वार्थ में अंधे हो चुके नेताओं पर भी गाज गिरने ही वाली है!...थोडासा और इंतज़ार करना पडेगा!

S.N SHUKLA said...

इस सार्थक पोस्ट के लिए बधाई स्वीकारें.

Viral Trivedi said...

salute

Pragya Sharma said...

Tantra ki viphalta janta ko negative bana deti hai .

संतोष कुमार said...

Waah ! Kamaal Kamaal Kamaal
sarthak post bilkul sahi vayang kiya hai aapne.
Bahut pasand aaya

Aabhaar...!

घनश्याम मौर्य said...

जाति आधारित आरक्षण तो था ही, अब धर्म-आधारित आरक्षण भी दे दिया, वह भी चुनावी हथकण्‍डे के रूप में। यह संविधान की आत्‍मा के विपरीत है।

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

ये भारतीय परम्परा अगले वर्ष भी निभाएंगे :)

mahendra verma said...

बहुतों के मन की बात आपने कह दी।
इनके ‘महान‘ कर्मों का फल इन्हें सही समय पर जरूर मिलेगा।

upendra chauhan said...

ये व्यंग्य नहीं कटाक्ष है उस सत्ता की असली सूरत है जो कुर्सी के दंभ में अंधी है
इन्साफ होगा और न्याय भी मिलेगा क्योंकि लोकतंत्र में जनता ही सर्व शक्तिमान है

कुश्वंश said...

आओ मिल कर सारे
इनको सबक सिखाओ,
लोकतंत्र के गद्दारों को
धूल चटाओ,
जनता से करते है सलाम
इनको पछतावा,
गर्त धकेलो इनको
करते रहे छलावा....

सटीक आलेख

dheerendra said...

आप जैसा सोचती है वैसा नही है कुछ लोग जरूर है जोकि गलत है,उन लोगों के कारण कांग्रेस को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है,वसे देखा जाय तो आज
कसी भी पार्टी सांसद या विधायक एक बार बन जाता है तो पाँच साल में करोड़पति बन जाता है
आज राज नीति की सोच ही बदल गई है.....

मेरे पोस्ट के लिए "काव्यान्जलि" मे click करे

मदन शर्मा said...

सोनिया की चली तो भारत का पहला लोकपाल बनेगा संसद आक्रमण विशेषज्ञ, उस्ताद मोहम्मद अफज़ल गुरु ! और सहायक लोकपाल मोहम्मद अजमल आमिर कसाब ! भारत की जनता को सामप्रदायिक सौहार्द सिखाने के लिए इससे बढ़िया उदाहरण और कोई हो ही नहीं सकता है ! लोकपाल बिल में अल्पसंख्यकों को आरक्षण देना ही चाहिए देश का भले ही बंटाधार हो जाय ! अल्पसंखयकों से तो वोट मिलेगा देश से भला क्या मिलेगा इन्हें ? देश की....... बजाते रहो..........हे राम.......

सुबीर रावत said...

भ्रष्टाचार तो सब जगह है उसके लिए दल या पार्टी कोई मायने नहीं रखती...... आप केंद्र ही क्यों राज्य सरकारों को भी देखिये. ..... यह भी सच है कि भ्रष्टाचार ऊपर से ही आता है.
नेता और नौकरशाही जब तक नहीं सुधरेंगे तब तक देश का भला कुछ नहीं होने वाला.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

कुछ न करने से तो लाख गुना बेहतर है कुछ करना, चाहे फिर अच्छे लोगों को नैतिक समर्थन देना ही क्यों न हो. अच्छे लोगों को पहचाने और उनका मनोबल बढ़ाएं. सच्चाई को सभी लोगों तक पहुंचायें जिन्हें ये राजनीतिबाज मूर्ख बनाते हैं.

Mohinee said...

EVM ka chamtakar,

Secular ka infection,

jativaad ka dankh....

Zeal ji salutes bahut sateek

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

@dheerendra
कुछ लोग कांग्रेस में गलत हैं???
ज़रा केंद्र सरकार में बैठे किसी एक मंत्री का नाम तो बताइये, जो की ईमानदार हो?

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

@सुबीर रावत,
नेता और नौकरशाही तब सुधरेंगे जब देश की जनता सुधरेगी| जब छदम सेक्युलर हिन्दू हिन्दुत्व को अपनाएंगे|
सरकार चाहे केंद्र की हो या राज्य की, भ्रष्ट होगी तो गालियाँ सुनेगी| और बड़ी ज़िम्मेदारी तो केंद्र की है, फिर उसका बचाव कैसे किया जा सकता है? जब उससे देश संभलता नहीं तो उसे कुर्सी पर बैठने का क्या हक़?

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

@सुबीर रावत,
नेता और नौकरशाही तब सुधरेंगे जब देश की जनता सुधरेगी| जब छदम सेक्युलर हिन्दू हिन्दुत्व को अपनाएंगे|
सरकार चाहे केंद्र की हो या राज्य की, भ्रष्ट होगी तो गालियाँ सुनेगी| और बड़ी ज़िम्मेदारी तो केंद्र की है, फिर उसका बचाव कैसे किया जा सकता है? जब उससे देश संभलता नहीं तो उसे कुर्सी पर बैठने का क्या हक़?

NISHA MAHARANA said...

very nice.

DUSK-DRIZZLE said...

SAHI LIKHA HAI APNE

डॉ0 अशोक कुमार शुक्ल said...

बहुत ही सुन्दर ओर विचारोत्तेजक आलेख
इन
गंभीर विषयों पर ध्यान आकर्षित कराने के लिये आप बधाई की पात्रा हैं

दीर्घतमा said...

इस पोस्ट के लिए बहुत -बहुत धन्यवाद कितना भी करे कांग्रेस तो अपनी ही चल चलेगी बहुत ठीक परिभाषित किया धन्यवाद.

दिगम्बर नासवा said...

हम तो इस चित्र से आगे ही नहीं बड पाए ...

प्रेम सरोवर said...

आपके पोस्ट पर आना सार्थक हुआ । बहुत ही अच्छी प्रस्तुति । मेर नए पोस्ट "उपेंद्र नाथ अश्क" पर आपकी सादर उपस्थिति प्रार्थनीय है । धन्यवाद ।

उपेन्द्र नाथ said...

लिस्ट बड़ी लम्बी है दिव्या जी. शायद आने वाला चुनाव इसका जबाब दे सके... विचारनीय पोस्ट.

dinesh aggarwal said...

आओ फिर से देश बचायें।
आओ मिलकर देश बनायें।।
ऐसा ही बस लिखे ZEAL जी,
भारत में फिर क्रांति लायें।
जिनने हमको अब तक लूटा,
आओ उनको धूल चटायें।
अब न जागे कब जागोगे,
देश ये नेता बेच न जायें।
जाति-धर्म में हमें बाँटकर,
ये हमको बेवकूफ बनायें।
नहीं काम की रही व्यवस्था,
क्यों न इसको शीघ्र मिटायें।
संसद में अब इन्हें न भेजे,
आओ इनको जेल भिजाये।
ZEAL जी आपने सचमुच मुझे जगा दिया,
हम भी आजाद हैं आपने अहसास दिला दिया।
आपका यह क्रांतिकारी आलेख कुछ करके दिखायेगा,
ऐसी रचनायें लिखने का मुझमें हौसला बढ़ा दिया।।
आपके क्रांतिकारी जज्बे को नमन, क्षमा चाहता
हूँ, उचित शब्द नहीं मिल रहें है आपकी एवं आपका
रचना की तारीफ के लिये।

Aditya Tikku said...

Saral va Satik-***

Aditya Tikku said...

Saral- Ispasht va Satik--***

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

भई बहुत सुन्दर प्रस्तुति वाह!

dheerendra said...

बहुत सुंदर आलेख ,...अच्छी प्रस्तुती,
क्रिसमस की बहुत२ शुभकामनाए.....

मेरे पोस्ट के लिए--"काव्यान्जलि"--बेटी और पेड़-- मे click करे

Rakesh Kumar said...

एक पुराना गीत याद आ रहा है

दिल जलता है तो जलने दे ..
आँसू न बहा फरियाद न कर

बुद्धिजीवी देशभक्तों की तो यही स्थति लगती है अभी .

राजनीति के दांवपेंच में अन्ना,स्वामी रामदेव आदि सभी पर ऐसी कीचड़ उछाली जाती है कि लगता है असली देशभक्त केवल दिग्विजयसिंह जैसे नेता ही रह गए हैं.

आपका आलेख सोचने को मजबूर करता है.

निर्झर'नीर said...

मन की बात कह दी। प्रभु आपकी कलम को रोशन करे धन्यवाद.

Anonymous said...

I am very glad to read your new posts! They are so great, and you are very creative! The world is but a canvas to the imagination. kamagra kamagra kamagra to buy [b]kamagra wiki [/b]

रविकर said...

बेस्ट ऑफ़ 2011
चर्चा-मंच 790
पर आपकी एक उत्कृष्ट रचना है |
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गोविन्द नारायण श्रीवास्तव said...

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Manoj Joshi said...

This is clear that people of Republic of India want change. As they say nothing is permanent except for change. The Congress (UPA) has been given a fair chance to rule since 2004 and now with their performance in the second innings that has not been very encouraging rather disappointing change becomes inevitable. The Bharatiya Janata Party and their allies are getting into the election mode two years well in advance. However, they (NDA) is required to chalk out a long term strategy planning an innings of at least ten to fifteen years. This means the 16th, 17th Lok Sabha and if possible the 18th Lok Sabha should be lead by the National Democratic Alliance. Also they need to choose the most suitable candidate for the post of India's Prime Minister whether they consider Smt Sushma Swaraj, Shri Arun Jaitley, Shri Lal Krishna Advani or Shri Jaswant Singh. The leader should be a person with the vision required. Moreover the BJP is yet to create history of their own. Their task is much more challenging as compared to the Congress and UPA as the latter already has a history of having ruled India for over fifty years. The entire text books speak of the good work of the Congress and their leaders. The BJP has to create the new order in the country that is Secular but does not indulge in 'Minority Appeasement' or 'Vote Bank Politics'. The minorities have to be taken into confidence by the BJP and work towards the goal they as a party have been emphasising upon viz. Abrogation of Article 370 in Kashmir, Uniform Civil Code, Connecting all the rivers in India; Shri Atal Bihari Vajpayee had promised this to India; and re-inculcate the lost confidence of the Indians in this party. The BJP has two years to do their homework and achieve their goal. Also as regards external affairs further develop cordial relations with all neighbours and encourage commercial relations which will promote the Indian industry and tackle the problem of economic slow down in the country.

विनीत कुमार सिंह said...

दी क़ुरबानी अशफाक भगत चंद्रशेखर ने
चाहत थी एक मुकम्मिल जहाँ बनाने की
आज़ादी तो मिली एक अभिशाप के साथ
आई पार्टी जो बनी मौज मस्ती की खातिर
कर रही है आज भी जम कर लूट-खसोट
मचा है चारो ओर एक घनघोर अन्धकार
अब तो उठो ऐ मेरे भारत के वीर सपूतों
पलट के ये तख्ते ताज बना दो इसे इतिहास